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डिजिटल उपनिवेशवाद का मायाजाल, और दक्षिण एशिया की नई डिजिटल जागृति

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  AI, deepfake और surveillance capitalism के युग में एक नई पीढ़ी इंटरनेट से नए सवाल पूछ रही है। इन्हीं सवालों के बीच उभरता ZKTOR मॉडल यह जांचने का प्रयास कर रहा है कि क्या सोशल मीडिया को ऐसे ढाँचे पर बनाया जा सकता है जहाँ privacy, digital dignity और स्थानीय अर्थव्यवस्था तकनीक के मूल डिजाइन का हिस्सा हों।  जब इंटरनेट केवल नेटवर्क नहीं रहा, बल्कि एक व्यवस्था बन गया इक्कीसवीं सदी के पहले दशक में इंटरनेट को अक्सर एक मुक्त डिजिटल संसार के रूप में देखा जाता था। यह वह समय था जब दुनिया भर के लोगों को लगा कि तकनीक सीमाओं को मिटा देगी, जानकारी को लोकतांत्रिक बना देगी और हर व्यक्ति को अपनी आवाज रखने का मंच देगी। ब्लॉग, फोरम और शुरुआती सोशल नेटवर्क उसी आशा के प्रतीक थे। इंटरनेट एक खुले मैदान जैसा था जहाँ कोई भी आ सकता था, अपनी बात कह सकता था और दुनिया के किसी भी कोने में बैठे लोगों से जुड़ सकता था। लेकिन जैसे-जैसे यह नेटवर्क बढ़ा, यह स्पष्ट होने लगा कि इंटरनेट केवल एक तकनीकी संरचना नहीं है। यह एक आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था भी बनता जा रहा है। अरबों उपयोगकर्ताओं की गतिविधियाँ, उ...